अंतर्राष्ट्रीय वृद्ध जन दिवस पर आयोजित की विचार गोष्ठी

 

 

 

चित्तौड़गढ़ 2 अक्टूबर, अंतरराष्ट्रीय वृद्ध जन दिवस पर हाउसिंग बोर्ड सेगवा रोड पर रिद्धि सिद्धि संस्थान द्वारा काव्य गोष्ठी का आयोजन किया गया, मुख्य अतिथि जागरूक पदाधिकारी दीपक शर्मा थे, इस दौरान वरिष्ठ साहित्यकार नंदकिशोर निर्झर, डा रमेश शर्मा, बुजुर्गो के सम्मान मे मार्मिक रचनाऐ पढी, जीवन शर्मा ने बच्चों पर हो रहे अत्याचार जुल्म एवं शोषण पर,तथा साहित्यकार पंकज झा सरकार ने मां-बाप को ओल्ड होम में रखना बडा दुर्भाग्य बताया, अब तो उड़ना सिख लिया है , अब तो अपने पंखों से रचाना खूब सराही गई। मदन सालवी ओजस्वी ने पहले बुजुर्गों का मान दख फिर गीता कुरान रख ,मांता पिता के सम्मान मे ओजपूर्ण रचना पढी ।कवयित्री कृष्णा सिन्हा ने अनुभव की खान हे वृद्ध जन रचना पढी। संस्थान की पदाधिकारी शोभा गर्ग ने संस्थान के विषय मे विस्तार से बताया तथा सभी का सहयोगात्मक रूख के लिऐ आभार परकट किया। साहित्यकार कुमार हरीश तथा राम राज राजस्थानी ने , जहां नही होते हम, बात हारी होती हे रचना पढी, विधिक सेवा प्राधिकरण से लवकुश खटीक, भारतीय दलित साहित्य अकादमी के जिला महासचिव बाबु लाल जीनवाल तथा सभी बुजुर्ग वृद्ध जन व सभी साहित्यकारों को साल ओढाकर माला पहनाकर श्री फल भेंटकर सम्मान किया गया।

 

 

साहित्यकार अमृत चंगेरिया ,भरत व्यास तथा सुनील बाटू ने रचनाऐ पढी, देवीलाल दमानी ने रचनाऐ पढी। नंदकिशोर निर्झर ने -जीवन पल-पल बीत रहा है , रचना पड़ी । मधुर व मीठे साहित्यकार अब्दुल सत्तार ने मां बाप के सम्मान मे बहूत आलौकिक रचना पढी व सफल संचालन किया। अंतर्राष्ट्रीय वृद्ध जन दिवस पर सभी वृद्ध जनों का सम्मान किया गया, रणधीर सिह सुहाग आदि ने वृद्ध ग्रह का अवलोकन किया गया, सभी ने व्यवस्थाएं देखकर प्रसन्नता व्यक्ति गई। देवी दमामी ने सभी के प्रति आभार व धन्यवाद प्रकट किया।

हमारे घर परिवार समाज मे संस्कार भरपुर हो तो किसी भी घर से किसी को ओल्ड होम ना जाना पडे, विचार भी व्यक्त किये गये।

बडी संख्या मे महिला पुरूष युवाओ आदि के एक साम वृद्ध जन के नाम, रखी गई काव्य निशा को सुनकर लाभान्वित हूऐ।

 

ओजस्वी लिखते हैस कि हम जो कुछ हे अपने ही मांता पिता बुजुर्गो की देन है, बुजरगों को चाहिए ही क्या है ,कितना चाहिए, कुछ भी तो नही। हम व्यर्थ मे क्या क्या नही उडा रहे है। मांता पिता को तकलीफ देना महापाप है।

मां बाप के पास बेठना,उन्हे सुनना, ख्याल रखना ही सम्पूर्ण भलाई व इसी मे सारी धार्मिकता छीपी है।

 

 

मदन सालवी ओजस्वी

जिलाध्यक्ष

भारतिय दलित साहित्य अकादमी चितोडगढ राजस्थान

 

2-10-2024