रिपोर्टर रामसिंह मीणा रघुनाथपुरा।
बड़ी सादड़ी कृषि विज्ञान केन्द्र चित्तौडगढ द्वारा संस्थागत कृषक प्रशिक्षण आयोजित किया गया। यह संस्थागत प्रशिक्षण मूंगफली उत्पादन तकनीकी पर आधारित था जिसमें जिले की बडी सादडी पंचायत समिति के पालाखेड़ी गांव से कुल 25 कृषक एवं कृषक महिलाओ ने भाग लिया। प्रशिक्षण प्रभारी डॉ. रतनलाल सोलंकी, कृषि विज्ञान केन्द्र, चित्तौड़गढ़ ने किसानों को बताया कि मूंगफली की खेती के लिये अच्छे जल निकास वाली, भुरभुरी दोमट व बलुई दोमट भूमि सर्वोत्तम रहती है। मिट्टी पलटने वाले हल तथा बाद में कल्टीवेटर से दो जुताई करके खेत को पाटा लगाकर समतल कर लेना चाहिए। जमीन में दीमक व विभिन्न प्रकार के कीड़ों से फसल के बचाव हेतु क्युनॉलफॉस 1.5 प्रतिशत 25 कि.ग्रा. प्रति हेक्टर की दर से अंतिम जुताई के साथ जमीन में मिला देना चाहिए। मूंगफली के बीज को ट्राइकोड्रमा उपचारित करने का प्रायोगिक तरीका समझाया। मूंगफली की फसल में उन्नत किस्में, समन्वित पोषक तत्व प्रबंधन का महत्व एवं आवश्यक पोषक तत्वों की जानकारी, पौधों पर पोषक तत्व की कमी के लक्षण एवं कमी को पूरा करने के उपाय के साथ ही मिट्टी के स्वास्थ्य की जांच हेतु मिट्टी नमुना लेने के तकनीकी से अवगत कराया। केन्द्र के कार्यकम सहायक श्री संजय कुमार धाकड ने किसानो को कहा कि खरपतवारों से बचने के लिये कम से कम दो बार निराई गुड़ाई की आवश्यकता पड़ती है। पहली बार फूल आने के समय दूसरी बार 2-3 सप्ताह बाद जबकि पेग (नस्से) जमीन में जाने लगते हैं। इसके बाद निराई गुड़ाई नहीं करनी चाहिए। जिन खेतों में खरपतवारों की ज्यादा समस्या हो तो बुवाई के 2 दिन बाद तक पेन्डीमेथालिन नामक खरपतवारनाशी की 3 लीटर मात्रा को 500 लीटर पानी में घोल बनाकर प्रति हैक्टर छिड़काव कर देना चाहिए। प्रशिक्षण के अंत में सभी कृषक एवं कृषक महिलाओ धन्यवाद अर्पित किया गया। 













